साइबर स्लेवरी: उत्तराखंड में नौकरी चाहने वालों के साथ ऑनलाइन ठगी का नया तरीका....

 साइबर स्लेवरी: उत्तराखंड में नौकरी चाहने वालों के साथ ऑनलाइन ठगी का नया तरीका

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हाल ही में उत्तराखंड में साइबर अपराधियों ने युवाओं को फंसाने के लिए एक नए तरीके का इस्तेमाल किया है, जिसे "साइबर स्लेवरी" (Cyber Slavery) कहा जा रहा है। इसके तहत नौकरी के झांसे में युवाओं को ऑनलाइन घोटालों और अपराधों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है।

क्या है साइबर स्लेवरी?

साइबर स्लेवरी एक आधुनिक अपराधिक योजना है, जिसमें युवाओं को नौकरी के लालच में फंसाकर उनसे ऑनलाइन घोटाले करवाए जाते हैं। अपराधी सोशल मीडिया और जॉब पोर्टल्स के जरिए नौकरी का झूठा प्रलोभन देते हैं और फिर उन्हें धमकी या जबरदस्ती से साइबर अपराधों में शामिल कर लेते हैं।

कैसे होता है शिकार?

  1. झूठी नौकरी की पेशकश: अपराधी युवाओं को ऑनलाइन वर्क-फ्रॉम-होम जॉब, डेटा एंट्री या कस्टमर सर्विस जैसी नौकरियों का ऑफर देते हैं।

  2. पर्सनल डिटेल्स मांगना: शिकार से बैंक डिटेल्स, आधार कार्ड और अन्य निजी जानकारियां मांगी जाती हैं।

  3. ब्लैकमेल या जबरदस्ती: बाद में उन्हें फर्जी कॉल सेंटर या ऑनलाइन स्कैम में शामिल कर लिया जाता है। अगर वे मना करते हैं, तो धमकाया जाता है।

उत्तराखंड में मामला सामने आया

हाल ही में उत्तराखंड पुलिस ने ऐसे ही एक गैंग का पर्दाफाश किया, जो युवाओं को साइबर स्लेवरी का शिकार बना रहा था। पीड़ितों को लुभावने वेतन और काम के आसान तरीकों के बहाने फंसाया जा रहा था।

कैसे बचें?

  • किसी भी ऑनलाइन जॉब ऑफर को सत्यापित किए बिना न स्वीकारें।

  • कंपनी की वेबसाइट और कर्मचारियों की जानकारी जरूर चेक करें।

  • कभी भी निजी या बैंकिंग जानकारी किसी अज्ञात स्रोत को न दें।

  • अगर संदेह हो, तो साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत करें।

निष्कर्ष

साइबर स्लेवरी एक गंभीर खतरा है, जो बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा है। सतर्कता और जागरूकता ही इससे बचने का सबसे बड़ा हथियार है।


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