मुंबई murder case: भूमाता ब्रिगेड माधुरी शिंदे हत्या कांड, पूरी कहानी....... पति ने ही.........

शक की आग - माधुरी शिंदे हत्याकांड की पूरी कहानी.....




शक, गुस्सा और फिर पति ने किया अपने ही पत्नी का खून.....  आज हम आपके साथ एक और दिल दहला देने वाली कहानी साझा करने जा रहे हैं। ये कहानी है महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की _ माधुरी शिंदे जो एक सामाजिक कार्यकर्ता और भूमाता ब्रिगेड नामक एक सामाजिक‑सांस्कृतिक संगठन की_कोल्हापुर जिला उपाध्यक्ष थीं, जिसने मुख्य रूप से कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का आंदोलन चलाया था।
अत: वे एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती थीं, जो महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक समानता जैसे मुद्दों पर काम करती थीं। माधुरी जिसकी उम्र लगभग 40 वर्ष थी उदगांव, शिरोळ तालुका, कोल्हापुर की निवासी थीं। बात 2018 की है _ सूर्यकांत शिंदे (उम्र लगभग 43 वर्ष) महाराष्ट्र के कोल्हापुर ज़िले में रहता था। उसकी पत्नी माधुरी शिंदे से उसके रिश्ते पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण थे। दोनों के बीच वैवाहिक मतभेद और शक‑संदेह के कारण दूरी बढ़ चुकी थी और इस विवाद के कारण दोनों एक ही शहर में अगल-अलग घर में रह रहे थें। 




माधुरी शिंदे जो की एक सामाजिक कार्यकर्ता और भूमाता ब्रिगेड नामक सामाजिक‑सांस्कृतिक संगठन की_कोल्हापुर जिला उपाध्यक्ष थीं, अत: वे एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती थीं, जो महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक समानता जैसे मुद्दों पर काम करती थीं। इस वजह से लोगों का उनके घर पे आना जाना लगा रहता था। इन्हीं लोगों में से एक युवक जिसका नाम संतोष श्रीकृष्ण माने था, जिससे माधुरी की नजदीकियां काफी बढ़ गई। माधुरी शादीशुदा होते हुए भी अपने पति से दूर रहा करती थी और इसी अकेलेपन का फायदा संतोष ने माधुरी से नजदीकियां बढ़ा के उठाया।

नजदीकियां बढ़ने के कारण संतोष माधुरी के घर हमेशा आया-जाया करता था। सूर्यकांत को माधुरी का ये रवैया ठीक नहीं लगता था, और संतोष का उसके घर इतना आना-जाना उसके मन को खटकता था।सूर्यकांत ने माधुरी से इस मामले पर बहुत बार बात की उसको समझाया लेकिन माधुरी जो संतोष के बहकावे में आ गई थी, वो सूर्यकांत की बातों को अनदेखा कर देती थी। सूर्यकांत के बार-बार के समझने के बावजूद भी संतोष का माधुरी के घर आना-जाना लगा रहा, वही माधुरी की ये हरकतें सूर्यकांत को नागवारा गुजरती थी।  पिछले दो सालों में उनके बीच का तनाव खुला रहस्य बन चुका था। मोहल्ले में चर्चा थी कि माधुरी का एक परिचित है—संतोष श्रीकृष्ण माने। संतोष की मौजूदगी, उसके फोन कॉल्स, और कभी-कभार घर आना—ये सब सूर्यकांत को चुभता था।

बात 26 जून 2018 की है जब सूर्यकांत ने कथित तौर पर देखा या संदेह किया कि उसकी पत्नी माधुरी और संतोष माने एक ही घर में अकेले हैं, बस, जैसे किसी ने पेट्रोल में माचिस की तीली गिरा दी हो। जो सूर्यकांत शिंदे अपनी पत्नी को समझा-समझा के थक गया था, वो आज अलग ही मूड में था गुस्से से आग बबूला,
सूर्यकांत ने बिना कुछ सोचे, घर से बाहर निकलते ही तेज़ कदमों से माधुरी के घर की ओर बढ़ना शुरू कर दिया।
माधुरी का घर छोटा था, लेकिन रसोई के दरवाजे पर एक लकड़ी का पुराना पल्ला था, जिसमें एक गोल सा सुराख था।

सूर्यकांत शिंदे 


सूर्यकांत ने उस सुराख से झांका—अंदर संतोष और माधुरी थे। दोनों  पास-पास खड़े होकर हंसते हुए बातें कर रहे थे,उस पल, सूर्यकांत की सांसें तेज़ हो गईं। दिल की धड़कनें कानों में हथौड़े की तरह बजने लगीं।
गुस्से में सूर्यकांत, माधुरी के घर का दरवाजा पीटने लगा और गुस्से में चीखा।दरवाज़ा खोलो माधुरी! सूर्यकांत की आवाज सुन कर भीतर से आवाज़ आई—तुम्हें क्या करना है?
सूर्यकांत जिसने माधुरी और संतोष को घर के अंदर अकेले में  हसीं मजाक करते हुए देख लिया था गुस्से में बोला,दरवाज़ा खोल वरना तोड़ दूँगा!
बाहर खड़े सूर्यकांत का गुस्सा देख कर संतोष ने घबराई हुई आवाज़ में कहा —भाई, शांत हो जाओ…

लेकिन सूर्यकांत जो की ये सब देख-देख कर और समझा-समझा कर थक चूका था उसके शांत होने का समय अब जा चुका था। सूर्यकांत ने दरवाज़े पर ज़ोर-ज़ोर से मुक्के मारने शुरू किए। अंत में जब दरवाजा खुला तब सूर्यकांत ने माधुरी से गुस्से में कहा तुम्हे शर्म नहीं आती? शादीशुदा होकर ये सब कर रही है? माधुरी ने भी तड़ाक से जवाब दिया—तुम्हें कोई हक नहीं है मुझ पर उंगली उठाने का! इन सब बातों के बीच माधुरी और सूर्यकांत के बीच बहस छिड़ गई और गुस्सा, अपमान, और शक—तीनों ने मिलकर सूर्यकांत के भीतर एक तूफ़ान खड़ा कर दिया। फिर जो उस दिन हुआ वो दिल दहला देने वाला था, सूर्यकांत ने गुस्से में माधुरी पर रसोई घर में रखे चाकू से हमला कर दिया। सूर्यकांत ने पहला वार  माधुरी के कंधे पर और दूसरा सीने के पास किया।माधुरी की चीख ने घर की दीवारें हिला दीं। कुछ ही मिनटों में, माधुरी ज़मीन पर गिर चुकी थीं—खून धीरे-धीरे रसोई की सफ़ेद टाइल्स पर फैलने लगा। चोट इतनी गंभीर थी कि उसकी वहीं मौत हो गई। संतोष माने भी घटना स्थल पर मौजूद था, लेकिन वह जान बचाकर भाग गया।
हत्या के तुरंत बाद सूर्यकांत शिंदे खुद पुलिस थाने पहुंचा और घटना की बात कबूल कर खुद ही आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और हत्या का मामला दर्ज किया।

पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची।  घटना के समय उपयोग में लाया गया चाकू भी घटनास्थल से बरामद कर लिया गया। पड़ोसियों के बयान लिए गए, जिनमें से कई ने बताया कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से झगड़े होते थे। पुलिस के जाँच पड़ताल में संतोष माने का नाम आया पुलिस ने संतोष माने को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, लेकिन उसके खिलाफ हत्या का आरोप नहीं था; उस पर संभावित उकसावे या अवैध संबंध के पहलू की जांच की गई। जांच में वैवाहिक कलह, शक और गुस्से को हत्या के मुख्य कारण के रूप में बताया गया।  मामला अदालत में चला। पुलिस ने ठोस सबूत पेश किए—हत्या का हथियार, गवाह, और आरोपी का खुद कबूलनामा। और सूर्यकांत को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।....................

यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है—यह शक, संवाद की कमी, और गुस्से के अंधेपन की कहानी है।
अगर उस दिन बातचीत होती, अगर रिश्ते को संभालने की कोशिश होती, तो शायद माधुरी आज ज़िंदा होती और सूर्यकांत जेल में नहीं होता।

चलिए मिलते हैं ऐसे ही अगले आर्टिकल में तब तक के लिए_धन्यवाद् 

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